क्योंकि हर एक फ्रेंड जरूरी होता है ...स्लोगन आपने सुना होगा परन्तु फेस बुक के हर फ्रेंड बेवजह एक गन्दी विडियो के कलैप एवं उसके वायरस से बदनाम होते जा रहे है .......लगभग फेसबुक के सभी यूज़र के पास स्वत फ्रेंड के मार्फ़त चाहे आपके फ्रेंड ने उसे वालपेपर पर पोस्ट किया हो तो भी न किया हो तो भी दोस्तों के नाम से वालपेपर पर चिपका मिलेगा .....आप यदि लालच वश उसे देखने की चेष्टा करेंगे की आपके दोस्तों पर शामत आ गिरेगी .....आपके सभी दोस्तों के वालपेपर पर यह वायरस आ जायेगा ....और आप मुफ्त हुए बदनाम .....दोस्तों फेसबुक को यह पता है पर अधिकारी इसे हटा पाने में अभी अक्षम है ....इस वायरस से आपका डाटा नष्ट हो सकता है .....फेसबुक, सावधान क्योंकि कुछ फ्रेंड वायरस भी होता है ...
सोमवार, 19 दिसंबर 2011
शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011
नहीं जानता मैं कि
जीतन मरांडी
रंगकर्मी का नाम है
नहीं जानता मैं
वह निर्दोष है या दोषी
पर
सच तो ये है
कि . लोग मारे गये
चिलखारी कांड में
या शायद
पूरी घटना ही काल्पनिक हो....
अपने बेटे के शव को देखता
बाबूलाल मरांडी की तस्वीर
शायद मेरी नज़रों का धोखा हो
यदि कहीं कोई मरा हो
यदि कहीं कोई हत्या हुई हो
यदि ये सत्य है
तो
कोई तो हत्यारा रहा होगा
कौन उसे ढूंढेगा
पुलिस,गाव के लोग,
जश्न मानते लोग या दुखी,पीड़ित लोग
या फिर एक प्रश्न चिन्ह बन कर रह जाएगा
चिलखारी
गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011
मगरमच्छ की आंसु बहा संवेदनाएं प्रकट कर
क्योंकि हम सिर्फ दुःख प्रकट कर सकते है उनके तकलीफों को महसूस कर सकते है परन्तु जिसे उन्होंने खोया है इसकी पूर्ति नहीं किया जा सकता है. ये बात मैं उन सन्दर्भ में कह रहा हूँ ...कल हमारे शहर में दो आटो में सामने से सीधी टक्कर हो गई जिसमे एक आटो में स्कूल के बच्चे भरे थे इनमे से एक १२ वर्ष का बच्चा अब इस दुनिया में नहीं रहा, कई बच्चे घायल है ..... इसी तरह कल ही एक आटो दुर्घटना में एक स्कूल की छात्रा भी स्वर्गवास हो गई ....आखिर ऐसा क्यों होता है जबकि हमारे यहाँ का पूरा प्रशासन आटो चालकों को सुधरने में लगा है ..... आखिर कब तक आटो चालक खुद को गरीब और प्रशासन का सताये बता कर अपनी मन मर्जी करते रहेंगे ..अमूमन हमने कई शहरों में देखा है आटो वाले अपनी मन मर्जी पर जीतें है, सड़कें उनकी बाप की हो जाती है जहाँ चाहा आटो रोकी , जैसे चाहा चल पड़े चाहें किसी को कुछ भी हो जाये .....ट्राफिक पुलिस जिसकी जिम्मेवारी ट्राफिक व्यवस्था को देखनी है ..ज्यादातर अवैध वसूली में लगे रहते है ....और हम देखा कर अनदेखा कर देतें है क्योंकि हमारे पास समय नहीं रहता या फिर ये रोज़मर्रा की बातें हो गई अत: ध्यान नहीं जाता दुर्घटनाएं होने पर हम मगरमच्छ की आंसु बहा संवेदनाएं प्रकट कर फिर रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त हो भूल जाते ....क्यों
गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011
ना जाने कब किस गली में कोई रावण अंकल मिल जाए
आज विजयदशमी है, आज ही के दिन युद्ध में रावण सर पराजित हुए और उनकी मौत हो गई, राम की विजय हुई, राम जी हमारे देवता है,जो हमारे मन के अंदर विराजमान है,इतना ज़्यादा की राम के नाम पर ही एक राजनैतिक पार्टी सत्ता में आई, मंदिर बनाने का वायदा किया...... फिर भूल गये....हम भी भूल गये क्योंकि हमारी राजनैतिक पार्टियाँ नित्य कोई नये मुद्दे छोड़ पुराने को भूलने पर विवश कर देती है...... आज विजयदशमी पर फिर राम-रावण की बात होगी,असत्य पर सत्य के जीत की बात होगी रावण को आज फिर असत्य,अज्ञानता,पाप का प्रतीक माना जाएगा और राम तो हमारे दिलों में है इतना की आज भी हम सीता की अग्नि-परिक्षा लेने में पिछे नहीं हटते ..... और सीता भी अब कहती है यार! जब अग्नि-परीक्षा देनी ही है तो तुम्हरे साथ वनवास क्यों ? कुछ तो खुल कर जीने दो...जीने का भरपूर मज़ा लेने दो ना जाने कब किस गली में कोई रावण अंकल मिल जाए और अग्नि-परीक्षा देनी पड़ जाए.....
मंगलवार, 30 अगस्त 2011
घर के दीमक से लड़ाई
बधाई! समस्त देशवासियों को अपने ही घर के दीमक से लड़ाई जीतने की पहले जश्न की बधाई! परन्तु सावधान !अपनी राजनीति के चालों से पानी में भी आग लगाने की जादू जानने वाले अभी सहमति तो दे रहे है परन्तु क्या ये मौका का फायदा उठाने वाले लोग हमेशा आपका साथ देंगे .
झारखण्ड में लोकायुक्त तो है परन्तु उन्हें कोई अधिकार नहीं दिया गया है जिससे उनका रहना या न रहना कोई मायने नहीं रखता, पंचायत चुनाव करा दिए गए,पार्षदों का चुनाव हो गया परन्तु अभी तक इन्हें अधिकार नहीं दिया गया है. बिना अधिकार के ही क्या मुखिया, पार्षद अपना समय गवां देगे या फिर इनकी काम करने की इच्छा ख़त्म हो जाएगी तब इन्हें अधिकार मिलेगा
बुधवार, 10 अगस्त 2011
वाह रे चाउमीन
करीब 10-15 वर्ष पूर्व हमारे शहर में जब रथ यात्रा का मेला लगा करता था तो मेला में सबसे खास बात मेला में मिलने वाला खाना पूरी और कोहड़ा का सब्जी हुआ करता था जो सभी लोग बड़े ही चाव से खाते थे ,उसे एक तरह से भगवन जगरनाथ का प्रसाद माना जाता था परन्तु समय के साथ सब बदल गया अब पूरी और कोहड़ा की जगह चाउमीन ने ले ली है सस्ता और सुलभ.
गुरुवार, 4 अगस्त 2011
बाबा कहते है , ५००/- एव १०००/- के नोटों को बंद करो ये काला
धन के सहायक है, मैंने भी देखा हमारे यहाँ के लोग 10, 20, 50, १००/- के नोटों को आराम से रख लेते है, परंतु ५००/- या १०००/- के नोट आपने दिया नहीं की उसे हाथों से ऊपर उठा कर उलट पलट कर देखने लगते है जैसे ५००/- या १०००/- के नोटों को कभी देखा ही न हो और आप अपने आपको अपराधी सा महसूस करेंगे, क्या आपने कभी अनुभव किया है कि कभी किसी अनजान जगह पर ज़रूरत पड़ने पर ५००/- या १०००/- के छुट्टा कराने पर लोग आपको शक कि नज़र से देखते है
धन के सहायक है, मैंने भी देखा हमारे यहाँ के लोग 10, 20, 50, १००/- के नोटों को आराम से रख लेते है, परंतु ५००/- या १०००/- के नोट आपने दिया नहीं की उसे हाथों से ऊपर उठा कर उलट पलट कर देखने लगते है जैसे ५००/- या १०००/- के नोटों को कभी देखा ही न हो और आप अपने आपको अपराधी सा महसूस करेंगे, क्या आपने कभी अनुभव किया है कि कभी किसी अनजान जगह पर ज़रूरत पड़ने पर ५००/- या १०००/- के छुट्टा कराने पर लोग आपको शक कि नज़र से देखते है
रविवार, 12 जून 2011
हर तरफ पानी का संकट हो रहा है और हमारे झारखण्ड में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमपर जोर दिया गयाहै परन्तु रांची शहर में बनने वाली हर नाली के नीचे की जमीन को पत्थर की ढलाई से सीमेंट देकर भर दिया जा रहा है जिसके कारण नाली में बहने वाली पानी जमीन के अन्दर नहीं जाकर पूरी तरह बह जा रही है, नालिओं का निर्माण वास्तव में उपयोग के बाद के पानी को बहा देना होता है जो पानी नाली के द्वारा जमीन के अन्दर जाता है जिससे धरती सूखती नहीं.
रविवार, 6 मार्च 2011
एक चुटकुला
एक चुटकुला - तीन सिपाही एक मोटरसाइकिल में बैठ कर सर में बिना हेलमेट पहने शहर में घूम रहे थे, किसी ट्राफिक वाले ने उस पर जुर्माना नहीं किया .......बताओ तो क्या हुआ.
रविवार, 27 फ़रवरी 2011
संघर्ष का मुद्दा
प्यासे को पानी
पानी को प्यासा
भूखे को खाना
खाना को भूखा
नेता को जनता
जनता को नेता
गैस को रसोई
रसोई को गैस
इनके बीच
खो गया है
प्यार
महत्वकंक्चा
और
उभर आया है
अहंकार
पवार
और पवार
पवार ही पावर
पवार के पैर तले
पीसते आम आदमी
फिर भी खुश है
क्योंकि
उनके बीच
ज़िन्दगी जीने का
संघर्ष का मुद्दा है
प्यास
पानी
भूख
खाना
गैस
और ..
नेताओं के कुटिल किस्से
पानी को प्यासा
भूखे को खाना
खाना को भूखा
नेता को जनता
जनता को नेता
गैस को रसोई
रसोई को गैस
इनके बीच
खो गया है
प्यार
महत्वकंक्चा
और
उभर आया है
अहंकार
पवार
और पवार
पवार ही पावर
पवार के पैर तले
पीसते आम आदमी
फिर भी खुश है
क्योंकि
उनके बीच
ज़िन्दगी जीने का
संघर्ष का मुद्दा है
प्यास
पानी
भूख
खाना
गैस
और ..
नेताओं के कुटिल किस्से
शनिवार, 1 जनवरी 2011
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